Tuesday , 16 January 2018
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तीसरा पेरी अर्बन विश्व सम्मेलन वर्ष 2019 में भारत में होगा, उदयपुर होगा आयोजन स्थल

केप टाउन (साउथ अफ्रीका) । तीसरा पेरी अर्बन विश्व सम्मेलन वर्ष 2019 में भारत मे होगा। दक्षिणी अफ्रीका में आयोजित दूसरे विश्व सम्मेलन के समापन में यह घोषणा की गई।  आयोजन समिति के प्रमुख  सदस्य ऑस्ट्रेलिया के डॉ कैथ ब्रिस्तोव, बसंत माहेश्वरी,न्यूज़ीलैंड के डॉ ब्रेनेट क्लोथिआर , दक्षिणी अफ्रीका के डॉ वेलेरी , डॉ मंजूषा एवं भारत के डॉ अनिल मेहता ने बताया कि सम्मेलन 25 से 27 नवम्बर 2019 में उदयपुर में होगा। विद्या भवन इसमे मुख्य समन्वयन का कार्य करेगा।
 उदयपुर स्मार्ट सिटी बनने की और अग्रसर है तथा विश्व नगरीय-उपनगरीय सम्मेलन का उदयपुर में होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सम्मेलन के समापन  अवसर पर डॉ अनिल मेहता ने कहा  कि समग्र  व समन्वित नगरीय विकास के लिए मास्टर प्लान बनाने की सम्पूर्ण प्रक्रिया को बदलना होगा। नगरीय आयोजना की वर्तमान प्रक्रिया में नगर   समीपवर्ती गांवो के संसाधनों का  दोहन-शोषण करते है  व बदले में  उन्हें कचरे व  गंदगी के विसर्जन स्थल बना देते है। आसपास के परिधि गांव उपनगर के रूप में विकसित होते है जंहा आवश्यक सुविधाएं नही होती तथा सामाजिक- आर्थिक व पर्यावरणीय आघात होते है।
 यदि परिधि (पेरिफेरी) गांवो को एक “उपनगर  संसाधन पट्टिका” के रूप में संरक्षित रखते हुए नगर का विस्तार हो तो नगर व गांव, दोनों का समग्र विकास होगा। कालांतर में  उपनगर संसाधन पट्टिका का स्वरूप भी  नगरीय हो जाएगा  लेकिन संसाधनों का संरक्षण समन्वित विकास सुनिश्चित करेगा।  शहरीकरण एक गतिशील व निरंतर होने वाली वास्तविकता है लेकिन यदि मास्टर प्लान  उपनगरीय(पेरि अर्बन ) पट्टिका को “टिकाऊ संसाधन स्त्रोत ” रखते हुए बनाना  प्रारंभ हो तो शहर व गांव दोनों स्मार्ट बनेंगे।
मेहता ने कहा कि प्राचीन भारत की  नगरीय आयोजना से पूरे विश्व को सीखना होगा जो नदी बेसिन, वाटरशेड आधारित हो जल् संरक्षण व
प्रकृति संरक्षण पर केंद्रित थी। नगरों की सीमाएं प्रशाशनिक व राजनीतिक इकाई के रूप में नही होकर जल् विभाजक रेखा के आधार  पर निश्चित की जानी चाहिए।
विश्व बैंक की अधिकारी रही साउथ  अफ्रीका प्लानिंग इंस्टीटूट की अध्यक्ष् नतहंतो मिनुकू ने कहा कि नगरों, उपनगरों, गांवो में विरोधाभासी जीवन परिस्थितियां है। मानवीय व पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से यह उचित नही है। इसलिए प्लानिंग के समस्त आयामो पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। बोरड़ संस्थान की कार्ली ने कहा कि केंद्रित वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट सिस्टम के बजाय विकेन्द्रित रूप से ज्यादा लाभदायक है।
ऑस्ट्रलिया के बसंत माहेश्वरी ने नगरीय आयोजना में व्यापक जनसहभागिता व पारिस्थितिकी संरक्षण को प्रमुख आयाम बताया।   माहेश्वरी ने कहा कि शहरी विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरह पेरी अर्बन विकास मंत्रालय भी होना चाहिए। भुज गुजरात के योगेश जडेजा ने उपनगरीय क्षेत्रो में प्रभावी भूजल प्रबंधन के मॉडल को प्रस्तुत किया।

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